haklane ki problem ka ilaaz Best Speech TherapyHaklane ki Problem ka Ilaaz Best Speech Therapy

जैसा कि आप लोगो को पता है कि हकलाना सिर्फ तीन आदतों के कारण होता है, पहला बिना स्वांस  बोलना, तेज रफ़्तार और साइकोलॉजी। हमें बस तीन ही चीज़ों पर कण्ट्रोल कराना है, पहला आपकी स्वास न लेने की जो आदत है, उसे स्वास लेने में तब्दील करना है, आपकी रफ़्तार को कम करना है और साइकोलॉजी को कम से कम करना है।

स्वास लंबा करना :- हम मरीज को अपनी प्रक्रिया से यह सिखाते है कि स्वांस लंबा कैसे किया जाए जिससे वह एक स्वास में अधिक से अधिक शब्द बोलने लगे। स्वास लंबा होने से मरीज खुद को कम स्वांस  में ज्यादा बोलने के लिए प्रेरित नहीं करेगा और वह आराम से लंबे स्वांस में धीरे धीरे अपनी बात रख सकेगा।

रफ़्तार काबू करना :- मान लीजिये आप कोई कार या बाइक चला रहे है।  आप जैसे जैसे रफ़्तार बढ़ाएंगे वैसे वैसे गाडी आपके कण्ट्रोल से बाहर होती जायेगी।  आपको डर लगने लगेगा और अंततः हो सकता है आपके साथ कोई हादसा हो जाए। इसलिए गाडी चलने का सबसे पहला नियम होता है कि जितनी कम रफ़्तार में हो सके उतनी कम रफ़्तार में चलाना चाहिए।  ठीक उसी तरह बोलने का नियम भी है। पर आदत बिगड़ जाने के कारण उस रफ़्तार को घर पर बैठ के कम कर पाना बहुत मुश्किल है। हम यहाँ पर मरीज को सिर्फ और सिर्फ अपनी स्पीच में ही बोलने को कहते है। यह बहुत ही धीमी लगभग गाने की तरह बोलने का तरीका होता है। इससे फ़ायदा यह होता है कि लगातार हमारे स्पीच में बोलने से मरीज का ध्यान धीरे बोलने पे आजाता है और वह रफ़्तार में भी काबू पा लेता है।

haklane ki problem ka ilaaz Best Speech Therapy

साइकोलॉजी :- अगर मरीज लगातार हमारी स्पीच में बोलता है तो उसके अटकने के चांस बहुत कम है, धीरे धीरे वह अटकना छोड़ ही देता है और इसका नतीजा यह होता है कि जैसे जैसे दिन बीतते जाते है वैसे वैसे उसके दिमाग से हकलाना नामक जीव मरता जाता है और उसकी साइकोलॉजी शून्य तक आ सकती है।

प्रेरणा और आत्मविश्वास :- अगर आत्मविश्वास ऊंचा हो तो कोई व्यक्ति कुछ भी पा सकता है। पहाड़ो पे चढ़ सकता है और बड़े से बड़े रोगों को हरा सकता है। हमारे इंस्टिट्यूट को यही बात किसी भी दूसरे सेण्टर से अलग बनाती है।  भगवंत अनमोल मोटिवेशन स्पीकर है और वे सर्टिफाइड माइंड ट्रेनर भी हैं।   इसीलिए हम मरीजो के आत्मविश्वास की वृद्धि के लिए कुछ अधिक ही काम करते है। मरीजो को २० से ३० लोगो के सामने रोज खड़े होकर हमारी स्पीच में ही बुलवाया जाता है। उन्हें हम बाज़ार लेकर जाते है और अजनबियों से बात करने के लिए प्रेरित करते है।

भगवंत अनमोल दिन में दो बार प्रेरणात्मक लेक्चर लेते है, जिस वजह से मरीज सिर्फ अपनी इसी समस्या पर जीत हासिल नहीं करता बल्कि वह ज़िन्दगी के कई और उसे मुकाम पा लेता है जो उसके सपने थे।

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