हकलाना क्या है ?

"लगातार बोलने के प्रयास में रुकावट या फिर किसी शब्द को बार बार बोलना ही हकलाना है। वैसे तो जीवन में हर कोई कभी न कभी अटकता है पर जो लगातार अटकने लगे उसे हकलाना कहते है। भारत में सौ में से ४ लोग इस बीमारी के शिकार होते है पर कई लोग इस बीमारी से बहुत जल्द छुटकारा पा जाते है पर १०० में से एक लोग इस समस्या का बड़े होकर भी शिकार रहते है। बड़े से बड़े लोग यहाँ तक कि हॉलीवुड अभिनेत्री एमिली ब्लंट, मार्लीन मोनोरो, एबीसी न्यूज़ चीफ बायरन पिट्स, एक्टर जेम्स अर्ल जोंस और बॉलीवुड एक्टर हृतिक रोशन भी इसके शिकार रहे है। कुछ लोग किसी ख़ास शब्द पे अटकते है, कुछ लोग एक शब्द को बार बोलते है और कुछ लोग किसी भयानक शब्द को बोलने के लिए पीछे से एक लंबी दौड़ लेते है और फिर बोलने का प्रयास करते है। कई बार आप अपने से जूनियर से बात करते वक्त तनिक भी नहीं अटकते। यह अटकना तब अधिक बढ़ जाता है जब आप किसी बड़े व्यक्ति या फिर किसी सीनियर से बात कर रहे होते है। उस समय आप डरे हुए होते है और आत्मविश्वास गिरा हुआ। इसके साथ ही आपकी रफ़्तार बढ़ी हुई होती है।
एक हकलाने वाला व्यक्ति हर जगह पर सही बोलना चाहता है। इस वजह से वह अपनी रफ़्तार पर ध्यान नहीं देता और उसकी रफ़्तार बहुत बढ़ी हुई होती है। मान लीजिये वह 'ट्रैन' बोलना चाहता है तो उसके पास दो विकल्प है। या तो वह ' ट्रे... ट्रे.. ट्रे ' बोलकर अपना शब्द पूरा करे या फिर इस ट्रैन शब्द को रेल से बदल दे। दोनों ही तरह में उसके अंदर साइकोलॉजी बैठ जाती है कि वह ट्रैन बोलने में अटकता है।
ज़िन्दगी में दो ही काम होते है। या तो आप कोई समस्या समय के साथ कम होती जाती है या फिर बढ़ती जाती हो। इस समस्या के साथ भी यही दो बाते होती है।
यह समस्या 3 से 5 वर्ष के बीच शुरू होती है और जैसे जैसे उम्र बढ़ती जाती है वैसे कुछ लोग ठीक होते है और जो लोग ठीक नहीं हो पाते उनकी समस्या उम्र बढ़ने के साथ और बढ़ती जाती है। पर क्या आपको पता है, पुरुषो में यह समस्या महिलाओ से 4 गुना अधिक पायी जाती है।

.