best way to overcome stammering

प्रश्न आपके, जवाब हमारे

हकलाना क्या है ?

हकलाना बीमारी नहीं एक गलत आदत है, जोकि जन्म से नहीं होती है। छोटी उम्र में किसी कारण से बच्चे का श्वास छोटा होने से यह शुरू होती है। श्वास छोटा होने के निम्न कारण होते हैं :-

  1. किसी बीमारी में शारीरिक कमजोरी आने से,
  2. किसी के डर से,
  3. किसी दूसरे हकलाने वाले की नकल करने से,
  4. कोई दुर्घटना या कोई हादसा होने से।

किसी भी कारण से आपका श्वास छोटा हुआ और आप रूक-रूक कर बोलने लगे (क्योंकि श्वास से ही स्वर बनता है ) आप रूक-रूक कर नहीं बोलना चाहते, असलियत का आपको ज्ञान नहीं, आप रूक-रूक कर बोलने की बजाय उसी कम श्वास में ज्यादा बोलने लगे, कम श्वास में ज्यादा बोलते-बोलते आपकी बोलने की स्पीड अपनी आखरी सीमा से आगे बढ़ गई और स्पीड बढ़ने के कारण ही आप अटक कर बोलने लग गये, इस अटकने को ही आप हकलाना कहते हैं।

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इसमें साइक्लोजी क्या है?

जो होगा वो तो दिमाग में आयेगा ही, छोटी उम्र से आज तक लगातार अटक कर बोलने से आपके दिमाग में यह बात आ चुकी है कि आप हकलाते हैं, इसी को आप साइक्लोजी कहते हैं।

कुछ व्यक्ति समझदार होने के बाद अपनी इस समस्या पर विशेष ध्यान देने लगते हैं, जो शब्द आपके बोलने में ज्यादा इस्तेमाल होते हैं, आपकी बोलने की स्पीड ज्यादा होने के कारण उन्हीं शब्दों पर आपको ज्यादा हकलाना महसूस होता है और उन्हीं अक्षरों को आप कठिन अक्षर समझ कर अपने दिमाग में छाँट लेते हैं कि इन विशेष अक्षरों पर मैं ज्यादा हकलाता हूँ।

हकलाने वाले व्यक्ति हर समय ठीक बोलने की कोशिश में रहते हैं। कठिन अक्षर दिमाग में छाँटने के बाद अब आपके सामने दो ही रास्ते हैं, या तो कठिन अक्षरों से संघर्ष करो या उसकी जगह दूसरा शब्द बोलो (जिसे आप आसान समझते हैं) जैसे या तो ’पा-पा-पा पानी’ बोलो या उसकी जगह ’जल’ बोलो। इस प्रकार कठिन अक्षरों से संघर्ष करने या शब्दों को बदल कर बोलने से आपकी साइक्लोजी बढती जायेगी और आप जीवन भर हकलाते रहेंगे।

भारत में हकलाने का यह इलाज हर जगह उपलब्ध नहीं है, इस विषय की रिसर्च केवल वो ही विशेषज्ञ कर सकता है जो अपने जीवन में खुद हकलाने से पीड़ित रहा हो तथा खुद ने अपना हकलाना ठीक किया हो। मैं भगवंत अनमोल 3 वर्ष की उम्र से लेकर 25 वर्ष की उम्र तक इस हकलाने से पीड़ित रहा हुँ, अपना खुद का हकलाना ठीक करने के बाद इस विषय की सफलता पूर्वक रिसर्च करके  यह सेन्टर चला रहा हूँ। अब मैं आपको बताना चाहूंगा कि सच्चाई क्या है ?

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हम शब्द के पहले अक्षर पर ही क्यों हकलाते हैं ?

आपकी बोलने की स्पीड अधिक होने के कारण आप चार या छह अक्षरों से बने शब्द को इकट्ठा बोलते हैं, इसे हम चौका या छक्का लगाना कहते हैं, जबान एक साथ चार या छह अक्षरों पर नहीं जा सकती, इसलिए आप शब्द के पहले अक्षर पर ही अटक जाते हैं।

हम गाना गाते समय क्यों नहीं हकलाते ?

श्वास छोटा, स्पीड ज्यादा, दिमाग में साइक्लोजी, इसी का नाम हकलाना है। गाना गाते समय इन तीनों कमजोरियों की पूर्ती हो जाती है। एक तो गाने की लाइन के शुरू में आप पूरा श्वास ले लेते हैं, दूसरा गाना गाते समय आपकी स्पीड कम हो जाती है, तीसरा आपका दिमाग अपनी समस्या से हटकर गाने की धुन में आ जाता है। इसलिए आप गाना गाते समय नहीं हकलाते।

क्या हकलाना ठीक हो सकता है?

जी बिलकुल, यह १०० प्रतिशत ठीक हो सकता है।  जैसा कि आपको पता है हकलाना एक आदत है और इस आदत को स्पीच थेरेपिस्ट भगवंत अनमोल के संरक्षण में ठीक किया जा सकता है।

हकलाना ठीक करने में कितना वक्त लग सकता है?

यह पूरी तरह आपके ऊपर निर्णभार करता है।  मेहनती और सकारात्मक व्यक्ति इसे मात्रा एक महीने में हमारे निगरानी में ठीक कर सकता है।

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